रोग निर्देश/फायदे:-
मुद्रा त्रिफलामृत चूर्ण एक उत्तम रसायन एंव मृद्व विरेचक है। इस चूर्ण का सेवन करने से समस्त प्रकार के मूत्र रोग, शोध, पाण्डु और विषमज्वर नष्ट होता है। यह चूर्ण आग्नि प्रदीपक है। कफ, पित्त, कुष्ठ, मलावरोध का नाश करने वाला है।
मुद्रा त्रिफलामृत चूर्ण नेत्र रोगों, बालों के रोगों समस्त उदर रोगों में भी उपयोगी है, इसमें सेवन से नेत्र ज्योति बनी रहती है। आंखों में थकान, सिर में दर्द, गैस, कब्ज इत्यादि की यह रामबाण दवा है।
परामर्शनुसार नियमित सेवन कर उपरोक्त रोगों में लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
सेवन विधि: रात्रि को सोने से पहले आधा चम्मच चूर्ण एक गिलास गुनगुने पानी के साथ लेना है। इसके लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। हर उम्र के लोगों के लिए लाभदायक है।